15 लाख करोड़ का झूठ! कैसे पकड़ी गई Rajesh Exports की चोरी? सेबी की जांच में 'सोने का सौदागर' एक्सपोज

Rajesh Exports Under SEBI Scanner

Rajesh Exports Under SEBI Scanner

नई दिल्ली: Rajesh Exports Under SEBI Scanner: देश की बड़ी दिग्गज ज्वेलरी निर्यातक और रिफाइनर कंपनी राजेश एक्सपोर्ट्स ने अपने ऊपर लगे वित्तीय धोखाधड़ी और अनियमितताओं के बड़े आरोपों को पूरी तरह खारिज कर दिया है. भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) द्वारा कंपनी के प्रमोटर और चेयरमैन राजेश मेहता पर कड़ा एक्शन लेने के ठीक एक दिन बाद कंपनी ने शेयर बाजार (BSE) को दी गई जानकारी में अपनी सफाई पेश की है.

राजेश एक्सपोर्ट्स ने आधिकारिक तौर पर बयान जारी कर कहा, "कंपनी द्वारा घोषित किए गए सभी रेवेन्यू के आंकड़े पूरी तरह से सही हैं और इसमें किसी भी तरह से बढ़ा-चढ़ाकर आंकड़े पेश नहीं किए गए हैं. ऐसा प्रतीत होता है कि बाजार नियामक सेबी और कंपनी के बीच किसी तरह का 'कम्युनिकेशन गैप' और भ्रम पैदा हो गया है." कंपनी ने यह भी स्पष्ट किया कि सेबी का यह आदेश अभी केवल अंतरिम है और किसी भी पहलू पर अभी तक कोई अंतिम या प्रतिकूल निष्कर्ष नहीं निकाला गया है. कंपनी सेबी को सभी आवश्यक और प्रमाणित दस्तावेज सौंपकर स्थिति को स्पष्ट करने की प्रक्रिया में जुटी है.

क्या हैं सेबी के गंभीर आरोप?

इससे पहले, सेबी के पूर्णकालिक सदस्य कमलेश चंद्र वार्शने ने एक अंतरिम आदेश में कहा था कि प्रथम दृष्टया राजेश एक्सपोर्ट्स ने वित्त वर्ष 2020-21 से वित्त वर्ष 2024-25 के दौरान लगभग 15,15,385 करोड़ रुपये का गलत वित्तीय विवरण पेश किया है. यह राशि कंपनी के कुल रेवेन्यू का लगभग 99.80 फीसदी हिस्सा है, जो कि इसकी विदेशी सहायक कंपनियों से जुड़ा हुआ था.

सेबी की जांच में यह भी सामने आया कि कंपनी ने कथित तौर पर बिना किसी पर्याप्त दस्तावेज या कारोबारी आधार के, व्यक्तिगत खातों और संबंधित संस्थाओं के माध्यम से फंड की हेराफेरी की. नियामक ने कहा कि कंपनी को वास्तविक वित्तीय रिकॉर्ड और फंड के इस्तेमाल की सटीक जानकारी देने के लिए कई बार समन भेजे गए और मौके दिए गए, लेकिन कंपनी की ओर से कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला.

चेयरमैन पर लगा प्रतिबंध, शेयरों में हाहाकार

चूंकि राजेश मेहता ही कंपनी के सर्वेसर्वा और मुख्य निर्णयकर्ता हैं, इसलिए सेबी ने उन्हें अगले आदेश तक कंपनी के शेयरों और प्रतिभूतियों में किसी भी प्रकार की प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष ट्रेडिंग करने से पूरी तरह प्रतिबंधित कर दिया है. यह पूरी जांच मार्च 2024 में एक शेयरधारक द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत के बाद शुरू हुई थी, जिसमें दो साल से अधिक समय से लंबित बड़े ट्रेड रिसीवेबल्स पर सवाल उठाए गए थे. इस पूरे घटनाक्रम के बाद शेयर बाजार में राजेश एक्सपोर्ट्स के शेयरों में भारी घबराहट देखी गई और गुरुवार को कंपनी का शेयर 5% के लोअर सर्किट के साथ धराशायी हो गया.